Vastu Tips for Navratri
19 Sep

इस नवरात्रे करे पूजन विधि में सुधार

शरदीय नवरात्रों से लेकर दीपावली तक का समय बेहद शुभ होता है। मौसम में बदलाव के साथ-साथ त्योहारों की खुशी सर्वत्र व्याप्त होती है। नवरात्रों में पूरा वातावरण बेहद रोमानी और पवित्र होता है एक ओर मां भगवती की पूजा आराधना तो दूसरी ओर रामलीला सबकुछ मन को लुभाने वाला होता है। अगर आप इस समय देवी की पूजा करते समय श्रद्धा भक्ति के साथ वास्तु के सरल उपचारों केा अपनायेंगे, तो फिर आपको मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।

कैसे करें देवी का स्वागत

  • अपने घर से फालतू का सामान जिसकी कभी जरूरत ना पड़ती हो, पुराने जूते-चप्पल आदि को निकाल कर बाहर करें।
  •  इस बात का खास तौर पर ध्यान रखें कि पूजा स्थल के आस-पास गंदगी ना हो। यह सुनिश्चित करें कि पूजा स्थल के आस-पास गंदे कपड़े ना रखे हों।
  • अगर आप नवरात्र के समय मंदिर का झंडा बदल रहे हैं, तो उस दुबारा लगाते समय ध्यान रखें कि वो उत्तर-पश्चिम में लगा हो।

पूर्व दिशा की शक्ति को बढ़ाये

पूजा में मन लगाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि पूर्व दिशा जागृत हो इसके लिए आप वास्तु के कुछ उपचारों को अपना सकते हैं।

  • इस जोन के साफ करें और यहां पर हल्का रंग करवायें, ताकि पूजा में आपका ध्यान लग सके।
  • कई बार ना चाहते हुए भी पूजा से ध्यान भटकने लगता है, इससे बचने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा में पिरामिड लगायें।
  • दीवार पर लाल धागे में क्रिस्टल बाॅल लटकायें।

नवरात्रि पूजा में रखें वास्तु का ध्यान

  • हर देवी देवतओ की अपनी खास दिशा होती है। मां दुर्गा की प्रतिमा दक्षिणामुखी होनी चाहिए। परंतु पूजा स्थल के नियम मंदिर से अलग होते है इसलिए घर में पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही अराधना करनी चाहिए।
  • नवरात्रि में देवी की आराधना के लिए मां दुर्गा की प्रतिमा को ईशान कोण या यानि की उत्तर-पूर्व दिशा में रखें।
  • अगर आप पूजा के दौरान अखंड ज्योत जलाते हैं, तो उसे दक्षिण-पूर्व दिशा में जलाएं।
  • पूजा के लिए उपयोग किये जाने वाले घड़े को लकड़ी के पटरे पर रखें।
  • वास्तुशास्त्र के प्राचीन ग्रंथों में पूजा के समय या किसी भी शुभ काम के समय हल्दी या कुंकुंम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाने की परंपरा है। इससे पूजा स्थल पर सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। पूजा से पूर्व आप भी पूजा स्थल पर स्वास्तिक का चिन्ह बनायें।

पूजा कक्ष की सजावट
जिस जगह पर आप भगवती की आराधना कर रहे हैं, उसकी सजावट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जिस कमरे में आप नियमित तौर पर पूजा करते हैं, उस कमरे में सफेद, हल्का पीला, हरा आदि जैसे हल्के रंगों का पेंट करना चाहिए।

  • पूजा कक्ष की सजावट करते समय रंगों का खास ख्याल रखें पूजा के कमरे में धार्मिक रंगों के पर्दों का इस्तेमाल बिल्कुल ना करें। पूजा स्थल के पर्दों के लिए दिशाओं से संबंधित रंगों का चयन करें।
  • पूजा करने के लिए पूजा स्थल पर माता की मूर्ति और प्रतिमा के स्थान पर उनकी फोटो रखें।
  • देवी की पूजा करते समय लाल रंग के ताजे फूलों का इस्तेमाल करें।

नवरात्रि के बाद करें कन्या पूजन
नवरात्रि के व्रत के बाद नवमी और अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन नौ कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने के बाद यथोचित दान देने से ही नवरात्रि व्रत की समाप्ति होती है। भक्त ध्यानू ने वैष्णो देवी के कहने पर कन्याओं की पूजा की थी तभी से यह पंरपरा चली आ रही है। इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि कन्याएं देवी का रूप होती हैं उन्हें यथोचित मान-सम्मान देकर ही जीवन में खुशहाली और सुख-शांति की प्राप्ति हो सकती है।

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