Vastu Shastra Tips for New Born Baby
25 Apr

बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए वास्तु
बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए यह बेहद जरूरी है कि पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ वह बाकी सारी गतिविधियों में भी सक्रिय हो। उसका विजन और माइंडसेट क्लियर हो कि उसे भविष्य में क्या करना है। बच्चों के चहुमुखी विकास के लिए उसे सही मार्गदर्शन और परिवेश के साथ-साथ सही वातावरण देना भी बेहद जरूरी होता है। अगर आपके प्रयासों के बावजूद आपका बच्चा मनमुताबिक नहीं कर रहा है, तो ऐसे में उसकी प्रगति और विकास के लिए वास्तु की मदद भी ले सकते हैं।
सच तो यह है कि पेरेंट्स बनने के बाद से ही बच्चों के भविष्य की चिंता हर किसी को सताने लगती है। मन में ढेरों सवाल उठते हैं कि किस तरह से हम अपने बच्चे के भविष्य को सुरक्षित कर सकें। कैसे हम उसके लिए सर्वश्रेष्ठ करियर चुनने के लिए प्रेरित करें। कई बार सबकुछ ठीक होते हुए भी तेज दिमाग होने के बावजूद बच्चा अपनी पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पाता है। उसका विजन क्लियर नहीं हो पाता कि उसे आगे चलकर क्या करना है। इसकी वजह आपके घर में वास्तु अंसतुलन भी हो सकता है।
ंिचंतित हैं बच्चो के इस व्यवहार से ।

  • आपके बच्चे का विजन क्लियर नहीं है।
  • वो अपनी पढ़ाई पर कंसनटरेट नहीं कर पा रहा ।
  • भविष्य को लेकर हमेशा असमंजस की स्थिति में रहता है।
  • पढ़ने बैठता है तो ध्यान सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर या दोस्तों की तरफ जाता है।
  • किसी से बात करते हुए हिचकता है।
  • अपने पेरेंट्स की बात नहीं सुनता क्या है कारण।
  • उसके कमरे में दक्षिण-पश्चिम में गेम या खेलकूद का सामान रखा होना।
  • स्टडी के जोन में दोस्तों के साथ मस्ती की तस्वीरों का होना।
  •   उसकी स्टडी टेबल मनोरंजन के जोन पूर्व-उत्तर-पूर्व में होना।
  •   बच्चे का कमरा दक्षिण-पश्चिम में स्थित होना।
  • उत्तर-पूर्व कटा होना या लाल रंग का होना।
  •   कमरे का पश्चिमी कोना कटा होना।
  • अग्नि तत्व का व दक्षिण ज़ोन का असंतुलित होना।
    वास्तु के उपायों पर करें अमल
    वास्तुशास्त्र में हर कार्य के प्रतिपादन के लिए अलग दिशा क्षेत्र हैं। बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए वास्तु के उपायों पर अमल करें।
  • अगर आपके बच्चे का विजन क्लियर नहीं है, तो आप उसका कमरा उत्तर-पूर्व में बनायें। यहां रहने से मन में नये विचार आते हैं बच्चा अपनी बात को किसी के भी समक्ष स्पष्टता से प्रस्तुत कर पाता हैं यहां रहने से उसकी सम्प्रेषण क्षमता बढ़ने के साथ-साथ उसका विजन क्लियर रहता है। साथ ही हंस पर विराजमान सरस्वती माता का चित्र भी लगाऐं।
  • बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए यह बेहद जरूरी है कि उसकी कम्यूनिकेशन स्किल बेहतर हो। जब भी वह पूर्व ज़ोन में वाद-विवाद की प्रैक्टिस करेगा तो उसकी कम्यूनिकेशन स्किल बेहतर हो जाऐंगी।
  • उसके कमरे में दक्षिण-पश्चिम में गेम्स, दोस्तों की तस्वीरें या फिर मनोरंजन का कोई अन्य सामान रखने से परहेज करें। यहाॅं पर जो भी सामग्री होगी उसी ओर उसका ध्यान कंेद्रित होगा। इसीलिए उसकी रुचि व विषय से संबंधित चीज़ो का इस ज़ोन में रखे।
    वास्तु मुताबिक हो कमरे की सजावट
  • बच्चे के कमरे में उसके पलंग को पूर्व-पश्चिम धुरी पर रखें। उनकी स्टडी टेबल इस तरह रखी होनी चाहिए कि पढ़ते समय उनका मुख पूर्व दिशा में ही रहे।
  • सोते समय पैर दक्षिण की ओर न करे। कमरे की दीवारों पर हल्के रंगों जैसे हरा, नीला या फिर हल्के पीले या आॅफ वाइट कलर का पेंट करवाना चाहिए।
  • उनके कमरे के पर्दों का रंग भी हरा, नीला या फिर पीला रखें।
  • उत्तर-पूर्व में उसके विषय से जुड़ी कोई तस्वीर लगाऐं।
  • बच्चों का बेड लगाते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि उसका सिर शौचालय की ओर ना हो। शौचालय विसर्जन की जगह है इस ओर सिर करके सोने से बच्चे का ध्यान पढ़ाई से हट जाता है।

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