कैसे मिले नौकरी में प्रमोशन।

नरेश सिंगल।  
नौकरीपेशा महिलाओं की तादाद तेजी से बढ रही है। आज हर स्‍तर पर और हर फील्‍ड में महिलाओं ने अपनी योग्‍यता 
को साबित कर दिखाया है। आप में योग्‍यता है तो आपको वरियता भी मिलनी ही चाहिए। लेकिन कई बार ऐसा होता है 
कि आप काबिल भी हैं और अपनी जिम्‍मेदारी को दूसरों से बेहतर निभाती भी हैं बावजूद इसके प्रमोशन कोई और ले 
जाता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो निश्चित रूप से आज का यह लेख आपके लिए ही है।  

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कुंडली में विद्यमान ग्रह हैं कारण उतार-चढ़ाव का कारण

आपने देखा  कि आपके किसी जानकार ने रियलएस्टेट के बिजनेस में हाथ आजमाया और कुछ ही सालों में उसकी आर्थिक स्थिति में भारी बदलाव आया।कल तक उसके पास अपना घर बनवा ने के लिए 100 गज का प्लाॅट तक खरीदने को पैसा नहीं था लेकिन आज वह लोगों के लिए फ्लैट बनाकर बेच रहा है।अमुक व्यक्ति को देखकर अगर आपने भी रियलएस्टेट में इन्वेस्ट करने का मन बना लिया है, तो फिर अपना पैसा वहां लगाने से पहले कुछ बातों पर विचार करना जरूरी है।

रियलएस्टेट का कारोबार संभावनाओं से भरा हुआ है, इसमें उतार-चढ़ाव आता रहता है।

एक व्यक्ति की सफलता के आधार पर इसमें इन्वेस्ट ना करें।

इस बात पर गौरफरमायें कि रियलएस्टेट के व्यवसाय को बनाने और बिगाड़ ने में व्यक्ति-विषेष की कुंडली में विद्यमान ग्रहों की दषाओं का विषेष महत्व होता है।

क्यों होता है रियलएस्टेट में उतारचढ़ाव

पिछले कुछ सालों में रियलएस्टेट के व्यवसाय में भारी फेरबदल हुआ है। कुछ बिल्डर्स टाॅप तक पहुंच गये हैं, तो कुछ एकदम धरातल पर पहुंच गये हैं। सच तो यह है कि रियलएस्टेट का अपार संभावनाओं के साथ-साथ रिस्क से भरा हुआ भी है। इसमें मेहनत और होषियारी तो मायने रखती है, लेकिन अगर केवल मेहनत और स्मार्टनेस ही काम करती, तो रियलएस्टेट के कारोबार में समय असमय गिरावट नहीं आती। वर्तमान में नामी बिल्डर्स के बहुत सारे फ्लैट्स बनकर तैयार हैं कम दाम होने के बावजूद उनके पास खरीदार नहीं हैं। सच तो यह है कि किसी भी काम की सफलता के लिए मेहनत के साथ-साथ भाग्य का साथ देना भी जरूरी है। अगर आपकी कुंडली में शनि और मंगल की दषा अच्छी है, तो फिर आप रियलएस्टेट के कारोबार में सफलता प्राप्त कर पायेंगे, लेकिन अगर ये दोनों अपने घर को छोड़कर किसी अन्य घर में विद्यमान होंगे, तो आपको घाटे का सामना करना पड़ेगा।

जन्म के पहले से होता है निर्धारित

आप अपने जीवन में जिन बातों का सामना करते हैं, उनका निर्धारण आपके जन्म से पूर्व ही हो जाता है। यह कतई जरूरी नहीं है कि अगर आप किसी सम्मानित या धनवान परिवार के व्यक्ति हैं, तो हमेषा आपके जीवन में सुख-समृ़िद्ध का वास रहेगा। सच तो यह है कि जीवन में सफलता और असफलता आपकी मेहनत के साथ-साथ आपके भाग्यपर औरआपकी कुंडली मेें ग्रह दषाओं की स्थिति परनिर्भर करती है।

 महत्वपूर्ण है मंगल और शनि की भूमिका

जब भी आप रियलएस्टेट में नफे-नुकसान की बात करते हैं, तो उसे जानने के लिए सबसे पहले मंगल-ग्रह और बुद्ध की स्थिति को समझना जरूरी  है। ऐसा इसलिए है कि मंगल ग्रह निर्माण कार्य को संचालित करता है जबकि बुद्ध जमीन पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करता है। अगर आपकी जन्म कुंडली में ये दोनों ग्रह सही जगह परस्थित नहीं हैं, तो फिर आपको रियलएस्टेट के कारोबार क्या आपको खुद के लिए का निर्माण कर वाने में ही बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

सच नहीं भ्रांति है ये

इस संबंध में लोगों में बहुत सारे मिथ प्रचलित हैं, जो कि किसी भी दृष्टिकोंण से सही नहीं कहे जा सकते।

लोगों में ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में काल सर्पदोष है वे हमेषा समस्याओं से ही घिरे रहते हैं। यह धारण बिल्कुल गलत है ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जो कुंडली में कालसर्पदोष होने के बावजूद सफलता के चरम तक पहुंचे हैं। बहुत सारे ऐसे सफल राजनीतिज्ञ, बिल्डर और फिल्मइंडस्टरी के सम्मानित लोग हैं, जिन्होंने कुंडली में कालसर्प दोष होने के बाद भी शनि की साढ़े साती को लेकर लोगों में ऐसी भ्रांति है कि शनि की साढ़े-साती हर किसी के लिए हानिकारक नहीं होती है। कुछ लोग इस दौरान अपार धन कमाते हैं। इस समय बड़ी जमीन खरीदकर वो बड़े बिल्डर बनजाते हैं, लेकिन यह मात्रभ्रांति ही है। यह जरूरी नहीं है कि हिन पर शनि की साढ़े साती चल रही है वो सारे लोग बड़े बिल्डर ही बनजायें।

 

ग्रहों की स्थिति से होता है घाटा और मुनाफा

जिसकी कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत होती है उसके बारे में ऐसी मान्यता है कि वो अच्छी खासी भूमि का मालिक होगा भले ही उसके पास प्राॅपर्टी हो या ना हो। यह सच है कि कुंडली में शनि का सही स्थान पर होना उसके पास भूमि होने को सुनिष्चित करता है, लेकिन यह भी सच है कि किसी की कुंडली में कोई भी ग्रह बहुत देर तक अच्छा या बुरा परिणाम देने वाला नहीं होता है। कोई ग्रह विषेष आपके लिए अच्छा है या बुरा यह साथी ग्रह की स्थिति पर भीनि र्भर करता है। अगर आपकी कुंडली में साथी ग्रह मित्र है, तो फिर आपको लाभ होगा, लेकिन साथी ग्रह विरोधी ग्रह है, तो फिर नुकसान का अंदेषा भी रहता है। आपकी कुंडली में  12  घर होते हैं और घर का अपना अलग प्रभाव होता है । कुंडली में ग्रह हमेषा चला यमान स्थिति में रहते हैं। कुछ ग्रहते जी से घूमते हैं और कुछ धीरे-धीरे। आपकी कुंडली में विद्यमान ग्रहों की स्थिति पर ही आपको रियलएस्टेट के व्यवाय में फायदा और घाटा होता है।

कुंडली में आठवां घर घाटे का होता है। जब किसी की कुंडली में शनि आठ वें घर के संपर्क में या किसी अन्य घर के संपर्क में आता है, तो उस पर उसी घर के गुण और दोषों का प्रभाव पड़ता है, जिस घर के वह संपर्क में आता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को लगातार आर्थिक मुष्किलों का सामना कर ना पड़ता है, लगातार होने वाले घाटे की वजह से प्राॅपर्टी बेचने तक की नौबत आ जाती है।

ऐसी ही स्थिति तब भी होती है, जब मंगल अपना घर छोड़कर पांच वे घर में पहुंच जाये। इस समय घटा बच्चों की वजह से होता है । ऐसी स्थिति में प्राॅपर्टी को घाटे में बेचने की नौबत तो नहीं आती है, लेकिन निरंतर नुक्सान का सामना करना पड़ सकता है। जिन लोगों को शनि की साढ़े साती सूट करती है उनके लिए तो यह निरंतर फायदे मंद साबित होती है। लेकिन जिन्हें साढ़े साती सूट नहीं करती उन्हें अच्छी स्थिति में होने के बावजूद आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।

 

Bachche ke Janam me deri ka karan ho sakta hai galat disha me Bedroom

बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए वास्तु
बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए यह बेहद जरूरी है कि पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ वह बाकी सारी गतिविधियों में भी सक्रिय हो। उसका विजन और माइंडसेट क्लियर हो कि उसे भविष्य में क्या करना है। बच्चों के चहुमुखी विकास के लिए उसे सही मार्गदर्शन और परिवेश के साथ-साथ सही वातावरण देना भी बेहद जरूरी होता है। अगर आपके प्रयासों के बावजूद आपका बच्चा मनमुताबिक नहीं कर रहा है, तो ऐसे में उसकी प्रगति और विकास के लिए वास्तु की मदद भी ले सकते हैं।
सच तो यह है कि पेरेंट्स बनने के बाद से ही बच्चों के भविष्य की चिंता हर किसी को सताने लगती है। मन में ढेरों सवाल उठते हैं कि किस तरह से हम अपने बच्चे के भविष्य को सुरक्षित कर सकें। कैसे हम उसके लिए सर्वश्रेष्ठ करियर चुनने के लिए प्रेरित करें। कई बार सबकुछ ठीक होते हुए भी तेज दिमाग होने के बावजूद बच्चा अपनी पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पाता है। उसका विजन क्लियर नहीं हो पाता कि उसे आगे चलकर क्या करना है। इसकी वजह आपके घर में वास्तु अंसतुलन भी हो सकता है।
ंिचंतित हैं बच्चो के इस व्यवहार से ।

  • आपके बच्चे का विजन क्लियर नहीं है।
  • वो अपनी पढ़ाई पर कंसनटरेट नहीं कर पा रहा ।
  • भविष्य को लेकर हमेशा असमंजस की स्थिति में रहता है।
  • पढ़ने बैठता है तो ध्यान सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर या दोस्तों की तरफ जाता है।
  • किसी से बात करते हुए हिचकता है।
  • अपने पेरेंट्स की बात नहीं सुनता क्या है कारण।
  • उसके कमरे में दक्षिण-पश्चिम में गेम या खेलकूद का सामान रखा होना।
  • स्टडी के जोन में दोस्तों के साथ मस्ती की तस्वीरों का होना।
  •   उसकी स्टडी टेबल मनोरंजन के जोन पूर्व-उत्तर-पूर्व में होना।
  •   बच्चे का कमरा दक्षिण-पश्चिम में स्थित होना।
  • उत्तर-पूर्व कटा होना या लाल रंग का होना।
  •   कमरे का पश्चिमी कोना कटा होना।
  • अग्नि तत्व का व दक्षिण ज़ोन का असंतुलित होना।
    वास्तु के उपायों पर करें अमल
    वास्तुशास्त्र में हर कार्य के प्रतिपादन के लिए अलग दिशा क्षेत्र हैं। बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए वास्तु के उपायों पर अमल करें।
    ऽ अगर आपके बच्चे का विजन क्लियर नहीं है, तो आप उसका कमरा उत्तर-पूर्व में बनायें। यहां रहने से मन में नये विचार आते हैं बच्चा अपनी बात को किसी के भी समक्ष स्पष्टता से प्रस्तुत कर पाता हैं यहां रहने से उसकी सम्प्रेषण क्षमता बढ़ने के साथ-साथ उसका विजन क्लियर रहता है। साथ ही हंस पर विराजमान सरस्वती माता का चित्र भी लगाऐं।
    ऽ बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए यह बेहद जरूरी है कि उसकी कम्यूनिकेशन स्किल बेहतर हो। जब भी वह पूर्व ज़ोन में वाद-विवाद की प्रैक्टिस करेगा तो उसकी कम्यूनिकेशन स्किल बेहतर हो जाऐंगी।
    ऽ उसके कमरे में दक्षिण-पश्चिम में गेम्स, दोस्तों की तस्वीरें या फिर मनोरंजन का कोई अन्य सामान रखने से परहेज करें। यहाॅं पर जो भी सामग्री होगी उसी ओर उसका ध्यान कंेद्रित होगा। इसीलिए उसकी रुचि व विषय से संबंधित चीज़ो का इस ज़ोन में रखे।
    वास्तु मुताबिक हो कमरे की सजावट
    ऽ बच्चे के कमरे में उसके पलंग को पूर्व-पश्चिम धुरी पर रखें। उनकी स्टडी टेबल इस तरह रखी होनी चाहिए कि पढ़ते समय उनका मुख पूर्व दिशा में ही रहे।
    ऽ सोते समय पैर दक्षिण की ओर न करे। कमरे की दीवारों पर हल्के रंगों जैसे हरा, नीला या फिर हल्के पीले या आॅफ वाइट कलर का पेंट करवाना चाहिए।
    ऽ उनके कमरे के पर्दों का रंग भी हरा, नीला या फिर पीला रखें।
    ऽ उत्तर-पूर्व में उसके विषय से जुड़ी कोई तस्वीर लगाऐं।
    ऽ बच्चों का बेड लगाते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि उसका सिर शौचालय की ओर ना हो। शौचालय विसर्जन की जगह है इस ओर सिर करके सोने से बच्चे का ध्यान पढ़ाई से हट जाता है।

Learn about Customized Vaastu

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We use to visit so many houses in our relations, in our friend circle and so on. It may be that some of them are living in 1 BHK while other may have 2 BHK, 3BHk or might have someone residing in a bungalow.

A difference can be in lifestyle and luxury but the basic required infrastructure is the same i.e. every house must have a kitchen area, bedroom, toilet etc. If you see, there are limited directions and limited basic residence requirements. And if you see it from the Vaastu perspective, you must question that if Vaastu makes difference then the results should be the same for the residents of a particular direction or house-planning. But is this really happen?

NO.!! It doesn’t happen.

You can understand it with few of the examples. See, so called Vaastu advisor suggests that master bedroom should be in South-west. Now, you need to take the case history of 10 such people who have their bedrooms in South-west. Do they have the same impact on their lives? Is their marital life is the same I mean, are they really living with love and harmony?

Same difference in results you can have if you take the case study of those who build a kitchen in South-east on the wise suggestions of their so-called Vaastu consultants.

Friends, a master bedroom in South-west does not suit everybody. Same with the kitchen and other such advisers which are not based on Customized Vaastu. In my so far career of 18 years, I had visited thousands of Houses, Commercial buildings, industries and I got the privilege to be the advisory for Parliament’s Vaastu.

Rather following general Vaastu I always insist on following Customized Vaastu which is only capable of giving you the expected results.

You would certainly like to ask what is Customize Vastu?  We have one thing which makes all the difference and that is our DOB (date of birth).  See, the main motive of Vaastu is to balance the five elements of given place whether it is a house or a factory. By following general Vaastu, you can balance the five elements but what about the same five elements which are in your personality i.e. in your date of birth. Customised Vastu Consultant takes the DOB of the head of the family or business organisation and then balanced the five elements with the land/ house he occupied.

Date of Birth is the key which reveals many hidden facts of your life, your personality, even of your destiny. This knowledge cannot be learnt in any classroom or by mere attending few classes. This is something which you can learn by practice, the practice of being pious, being connected with the soul, and being connected nature. Some people think that this is all about calculations.